गुजरात की नहर सौर ऊर्जा परियोजना (Canal-Top Solar Project) के बारे में जानकारी Wikipedia और Sanskriti IAS पर उपलब्ध है:
• शुरुआत और उद्देश्य: इस अनूठी पहल की शुरुआत वर्ष 2012 में नर्मदा नहर पर 1 मेगावाट की पायलट परियोजना के साथ हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य बिजली पैदा करना और जमीन बचाना है।
• भूमि की बचत: नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाने से महंगे और कठिन भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ती है, जिससे कीमती कृषि भूमि बचती है। लगभग 100 एकड़ से अधिक कृषि भूमि का उपयोग बचाया गया है।
• जल संरक्षण (वाष्पीकरण रोकना): नहरों की सतह पर पैनल होने से सीधा सूर्य का प्रकाश पानी पर नहीं पड़ता, जिससे हर साल लाखों लीटर पानी वाष्प बनकर उड़ने से बच जाता है।
• पैनल की कार्यक्षमता में वृद्धि: नहर के पानी के वाष्पीकरण से मिलने वाली प्राकृतिक ठंडक (Evaporative cooling) के कारण सौर पैनलों का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे उनकी बिजली बनाने की दक्षता 2.5% से 8.8% तक बढ़ जाती है।
• चुनौतियाँ: ऊंचे और मजबूत स्टील के ढांचे (structural steel) बनाने तथा संक्षारण (corrosion) से बचाने के कारण इसकी प्रति मेगावाट निर्माण लागत (₹6.5 करोड़ से ₹9 करोड़) सामान्य जमीन पर लगने वाले सोलर पार्कों की तुलना में काफी अधिक आती है।
Facebook·Sikhle India
Facebook
Gujarat is showing the world how one idea can solve three ...
Translated — It prevents algae growth. And it shades the canal workers who operate and maintain the system below. Gujarats canal network stretches over 75,000 kilometres. If...
SuperKalam
Canal-Top Solar in India: Potential, Benefits, Challenges - SuperKalam
Translated — Key Takeaways * Canal-Top Photovoltaic (CTPV) systems mount solar panels over irrigation canals on elevated substructures, eliminating the need for dedicated

No comments:
Post a Comment